menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
chevron_left
chevron_right
शक्र उवाच
अय़ं सुतस्ते द्विजमुख्य नाग; श्चाघ्राय़ते त्वामभिवीक्षमाणः |  ५८   क
पादौ च ते नासिकय़ोपजिघ्रते; श्रेय़ो मम ध्याहि नमश्च तेऽस्तु ||  ५८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति