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अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
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शक्र उवाच
हन्तैहि व्राह्मण क्षिप्रं सह पुत्रेण हस्तिना |  ६१   क
प्राप्नुहि त्वं शुभाँल्लोकानह्नाय़ च चिराय़ च ||  ६१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति