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उद्योग पर्व
अध्याय १०५
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नारद उवाच
सोऽहं पापः कृतघ्नश्च कृपणश्चानृतोऽपि च |  १२   क
गुरोर्यः कृतकार्यः संस्तत्करोमि न भाषितम् |  १२   ख
सोऽहं प्राणान्विमोक्ष्यामि कृत्वा यत्नमनुत्तमम् ||  १२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति