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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५१
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वैशम्पाय़न उवाच
तौ गत्वा धृतराष्ट्रस्य गृहं शक्रगृहोपमम् |  २५   क
ददृशाते महाराज धृतराष्ट्रं जनेश्वरम् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति