menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
भीष्म पर्व
अध्याय १०५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
अद्य ते पुरुषव्याघ्र प्रतिमोक्ष्ये ऋणं महत् |  २७   क
भर्तृपिण्डकृतं राजन्निहतः पृतनामुखे ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति