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द्रोण पर्व
अध्याय १०५
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द्रोण उवाच
न सभाय़ां जय़ो वृत्तो नापि तत्र पराजय़ः |  १५   क
इह नो ग्लहमानानामद्य तात जय़ाजय़ौ ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति