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द्रोण पर्व
अध्याय १०५
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द्रोण उवाच
ततः स हेमचित्रं तं स्यन्दनप्रवरं गदी |  ३४   क
गदय़ा पोथय़ामास साश्वसूतध्वजं रणे ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति