आदि पर्व  अध्याय १०६

वैशम्पाय़न उवाच

अथ पारशवीं कन्यां देवकस्य महीपतेः |  १२   क
रूपय़ौवनसम्पन्नां स शुश्रावापगासुतः ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति