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शान्ति पर्व
अध्याय १०६
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मुनिरु उवाच
आरम्भांश्चास्य महतो दुष्करांस्त्वं प्रय़ोजय़ |  १५   क
नदीवन्धविरोधांश्च वलवद्भिर्विरुध्यताम् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति