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शान्ति पर्व
अध्याय १०६
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मुनिरु उवाच
वर्तमानः स्वशास्त्रे वै संय़तात्मा जितेन्द्रिय़ः |  ८   क
अभ्युद्धरति चात्मानं प्रसादय़ति च प्रजाः ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति