आदि पर्व  अध्याय १६०

गन्धर्व उवाच

शुश्रूषुरनहंवादी शुचिः पौरवनन्दनः |  १४   क
अंशुमन्तं समुद्यन्तं पूजय़ामास भक्तिमान् ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति