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अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
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भगीरथ उवाच
पय़स्विनीनामथ रोहिणीनां; तथैव चाप्यनडुहां लोकनाथ |  ३४   क
प्रादां नित्यं व्राह्मणेभ्यः सुरेश; नेहागतस्तेन फलेन चाहम् ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति