वन पर्व  अध्याय १०६

लोमश उवाच

असमञ्जाः पुरादद्य सुतो मे विप्रवास्यताम् |  १४   क
यदि वो मत्प्रिय़ं कार्यमेतच्छीघ्रं विधीय़ताम् ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति