वन पर्व  अध्याय १०६

लोमश उवाच

स दृष्ट्वा तेजसो राशिं पुराणमृषिसत्तमम् |  २२   क
प्रणम्य शिरसा भूमौ कार्यमस्मै न्यवेदय़त् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति