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शान्ति पर्व
अध्याय १२४
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श्रीरु उवाच
स शक्रो व्रह्मचारी च यस्त्वय़ा चोपशिक्षितः |  ५८   क
त्रैलोक्ये ते यदैश्वर्यं तत्तेनापहृतं प्रभो ||  ५८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति