उद्योग पर्व  अध्याय १०६

सुपर्ण उवाच

अनुशिष्टोऽस्मि देवेन गालवाज्ञातय़ोनिना |  १   क
व्रूहि कामनुसंय़ामि द्रष्टुं प्रथमतो दिशम् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति