अनुशासन पर्व  अध्याय १३५

भीष्म उवाच

मनोजवस्तीर्थकरो वसुरेता वसुप्रदः |  ८७   क
वसुप्रदो वासुदेवो वसुर्वसुमना हविः ||  ८७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति