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वन पर्व
अध्याय २२१
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मार्कण्डेय़ उवाच
तत्र विद्यागणाः सर्वे ये केचित्कविभिः कृताः |  २१   क
यस्य कुर्वन्ति वचनं सेन्द्रा देवाश्चमूमुखे ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति