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शल्य पर्व
अध्याय ६२
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वैशम्पाय़न उवाच
प्रविश्य नगरं वीरो रथघोषेण नादय़न् |  ३३   क
विदितो धृतराष्ट्रस्य सोऽवतीर्य रथोत्तमात् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति