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भीष्म पर्व
अध्याय १०६
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सञ्जय़ उवाच
विराटद्रुपदौ वृद्धौ कुन्तिभोजश्च दंशितः |  ५   क
अभ्यद्रवत गाङ्गेय़ं पुत्रस्य तव पश्यतः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति