menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
chevron_left
chevron_right
श्रीरु उवाच
प्रय़त्नेनापि चारक्षच्चित्तं पुत्रस्य वै पिता |  ७६   क
व्यभजंश्चापि संरम्भाद्दुःखवासं तथावसन् ||  ७६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति