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द्रोण पर्व
अध्याय १०६
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सञ्जय़ उवाच
ततो वाणमय़ं जालं भीमसेनरथं प्रति |  ३१   क
कर्णेन विहितं राजन्निमेषार्धाददृश्यत ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति