menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १०६
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
स वैकल्यं महत्प्राप्य छिन्नधन्वा शरार्दितः |  ५४   क
तथा पुरुषमानी स प्रत्यपाय़ाद्रथान्तरम् ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति