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आदि पर्व
अध्याय १०७
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः पुत्रशतं जज्ञे गान्धार्यां जनमेजय़ |  १   क
धृतराष्ट्रस्य वैश्याय़ामेकश्चापि शतात्परः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति