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शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
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भीष्म उवाच
त्रिषु लोकेषु यद्वृत्तं सर्वं तव मते स्थितम् |  १८   क
तदाज्ञापय़ विप्रर्षे व्रूहि किं करवाणि ते ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति