आदि पर्व  अध्याय १०७

वैशम्पाय़न उवाच

स तथा विदुरेणोक्तस्तैश्च सर्वैर्द्विजोत्तमैः |  ३३   क
न चकार तथा राजा पुत्रस्नेहसमन्वितः ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति