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आदि पर्व
अध्याय १०७
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः पुत्रशतं सर्वं धृतराष्ट्रस्य पार्थिव |  ३४   क
मासमात्रेण सञ्जज्ञे कन्या चैका शताधिका ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति