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आदि पर्व
अध्याय १३२
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वैशम्पाय़न उवाच
दग्धानेवं स्वके गेहे दग्धा इति ततो जनाः |  १७   क
ज्ञातय़ो वा वदिष्यन्ति पाण्डवार्थाय़ कर्हिचित् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति