menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
chevron_left
chevron_right
भीष्म उवाच
परं भावं हि काङ्क्षामि यत्र नावर्तते पुनः |  ५०   क
सर्वसङ्गान्परित्यज्य निश्चितां मनसो गतिम् ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति