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अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
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भीष्म उवाच
व्राह्मणान्पूजय़ेच्चापि तथा स्नात्वा नराधिप |  १३४   क
देवांश्च प्रणमेत्स्नातो गुरूंश्चाप्यभिवादय़ेत् ||  १३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति