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अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
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भीष्म उवाच
पत्नीं रजस्वलां चैव नाभिगच्छेन्न चाह्वय़ेत् |  १४२   क
स्नातां चतुर्थे दिवसे रात्रौ गच्छेद्विचक्षणः ||  १४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति