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अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
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भीष्म उवाच
त्रीणि तेजांसि नोच्छिष्ट आलभेत कदाचन |  ३०   क
अग्निं गां व्राह्मणं चैव तथास्याय़ुर्न रिष्यते ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति