अनुशासन पर्व  अध्याय १४

वासुदेव उवाच

वालखिल्या मघवता अवज्ञाताः पुरा किल |  ६२   क
तैः क्रुद्धैर्भगवान्रुद्रस्तपसा तोषितो ह्यभूत् ||  ६२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति