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अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
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भीष्म उवाच
उपानहौ च वस्त्रं च धृतमन्यैर्न धारय़ेत् |  ५३   क
व्रह्मचारी च नित्यं स्यात्पादं पादेन नाक्रमेत् ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति