अनुशासन पर्व  अध्याय १०७

भीष्म उवाच

न संनिकृष्टो मेधावी नाशुचिर्न च सत्सु च |  ८३   क
प्रतिषिद्धान्न धर्मेषु भक्षान्भुञ्जीत पृष्ठतः ||  ८३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति