वन पर्व  अध्याय १०७

लोमश उवाच

स शुश्राव महावाहुः कपिलेन महात्मना |  २   क
पितॄणां निधनं घोरमप्राप्तिं त्रिदिवस्य च ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति