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द्रोण पर्व
अध्याय १०७
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सञ्जय़ उवाच
तय़ोः प्रैक्षन्त संमर्दं संनिकृष्टमहास्त्रय़ोः |  ३१   क
तव दुर्मन्त्रिते राजन्सपुत्रस्य विशां पते ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति