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शान्ति पर्व
अध्याय १०८
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युधिष्ठिर उवाच
राज्ञां वृत्तं च कोशश्च कोशसञ्जननं महत् |  २   क
अमात्यगुणवृद्धिश्च प्रकृतीनां च वर्धनम् ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति