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शान्ति पर्व
अध्याय १०८
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भीष्म उवाच
मन्त्रगुप्तिः प्रधानेषु चारश्चामित्रकर्शन |  २४   क
न गणाः कृत्स्नशो मन्त्रं श्रोतुमर्हन्ति भारत ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति