अनुशासन पर्व  अध्याय १०८

भीष्म उवाच

दशाचार्यानुपाध्याय़ उपाध्याय़ान्पिता दश |  १४   क
दश चैव पितॄन्माता सर्वां वा पृथिवीमपि ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति