वन पर्व  अध्याय १०८

लोमश उवाच

दर्शय़स्व महाराज मार्गं केन व्रजाम्यहम् |  १३   क
त्वदर्थमवतीर्णास्मि पृथिवीं पृथिवीपते ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति