वन पर्व  अध्याय १०८

लोमश उवाच

तां दधार हरो राजन्गङ्गां गगनमेखलाम् |  ९   क
ललाटदेशे पतितां मालां मुक्तामय़ीमिव ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति