आश्वमेधिक पर्व  अध्याय २६

व्राह्मण उवाच

व्रह्मैव समिधस्तस्य व्रह्माग्निर्व्रह्मसंस्तरः |  १७   क
आपो व्रह्म गुरुर्व्रह्म स व्रह्मणि समाहितः ||  १७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति