आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ३७

व्रह्मो उवाच

वधवन्धपरिक्लेशाः क्रय़ो विक्रय़ एव च |  ४   क
निकृन्त छिन्धि भिन्धीति परमर्मावकर्तनम् ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति