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भीष्म पर्व
अध्याय १०८
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सञ्जय़ उवाच
विजय़ी च रणे नित्यं भैरवास्त्रश्च पाण्डवः |  २४   क
तस्य मार्गं परिहरन्द्रुतं गच्छ यतव्रतम् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति