द्रोण पर्व  अध्याय १०८

धृतराष्ट्र उवाच

पुत्रस्नेहाभिभूतेन मय़ा चाप्यकृतात्मना |  १२   क
धर्मे स्थिता महात्मानो निकृताः पाण्डुनन्दनाः ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति