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द्रोण पर्व
अध्याय १०८
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सञ्जय़ उवाच
स काङ्क्षन्भीमसेनस्य वधं वैकर्तनो वृषः |  २०   क
शक्तिं कनकवैडूर्यचित्रदण्डां परामृशत् ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति