आदि पर्व  अध्याय १०९

पाण्डुरु उवाच

अगस्त्यः सत्रमासीनश्चचार मृगय़ामृषिः |  १४   क
आरण्यान्सर्वदैवत्यान्मृगान्प्रोक्ष्य महावने ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति