शान्ति पर्व  अध्याय २३५

व्यास उवाच

अतः परं परममुदारमाश्रमं; तृतीय़माहुस्त्यजतां कलेवरम् |  २७   क
वनौकसां गृहपतिनामनुत्तमं; शृणुष्वैतत्क्लिष्टशरीरकारिणाम् ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति