आदि पर्व  अध्याय १०९

वैशम्पाय़न उवाच

राजा पाण्डुर्महारण्ये मृगव्यालनिषेविते |  ५   क
वने मैथुनकालस्थं ददर्श मृगय़ूथपम् ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति