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शान्ति पर्व
अध्याय १०९
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युधिष्ठिर उवाच
किं कार्यं सर्वधर्माणां गरीय़ो भवतो मतम् |  २   क
यथाय़ं पुरुषो धर्ममिह च प्रेत्य चाप्नुय़ात् ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति